झारखंड हाईकोर्ट ने अवैध नियुक्ति के मामले में विधानसभा से चार सप्ताह में विस्तृत जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने विधानसभा को यह बताने को कहा है कि अवैध नियुक्तियों की जांच के लिए बने आयोग की सिफारिशों पर अब तक क्या कार्रवाई की गयी है।

इस संबंध में शिवशंकर शर्मा ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2007-08 में झारखंड विधानसभा में 150 लोगों की नियुक्ति में भारी गड़बड़ी की गयी है। नियुक्ति में नियमों का पालन नहीं किया गया और अयोग्य लोगों को भी नियुक्त किया गया है। जिस समय नियुक्ति हुई उस समय आलमगीर आलम स्पीकर थे। 

अधिवक्ता राजीव कुमार ने बताया कि झारखंड विधानसभा में हुई नियुक्ति में अनियमितता की जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनायी गयी थी। कमेटी ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी है। जांच में 20 ऐसे बिंदु  का जिक्र किया गया है जिसमें अनियमितता पायी गयी है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी थी। 

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राजभवन ने इसे कार्रवाई के लिए विधानसभा सचिवालय को प्रेषित किया था। लेकिन अभी तक विधानसभा सचिवालय ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। अदालत से इस मामले की सीबीआई जांच कराने का आग्रह किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने विधानसभा को चार सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल कर यह बताने को कहा है कि जांच रिपोर्ट के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गयी है।



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