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बिहार में विधान परिषद चुनावों के लिए अब अधिक समय शेष नहीं रह गया है। ये चुनाव इस साल मार्च-अप्रैल में हो सकते हैं और इससे ठीक पहले कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का महागठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि राजद नेता तेजस्वी यादव ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। तेजस्वी के इस रुख पर कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी सभी 24 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने में सक्षम है।
2016 में इन 24 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस ने चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और इनमें से केवल एक सीट पर उसे जीत नसीब हुई थी। इस बार चुनाव में कांग्रेस ने छह सीटों की मांग की थी, जिस पर राजद के साथ सहमति नहीं बन पाई। पिछले साल अक्तूबर में कुशेश्वरस्थान और तारापुर में हुए विधानसभा उपचुनाव में भी राजद और कांग्रेस ने अलग चुनाव लड़ा था और दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने प्रत्याशी खड़े किए थे।
शनिवार को तेजस्वी यादव ने संकेत दिया था कि हमारी पार्टी एमएलसी चुनावों में अकेले चुनाव लड़ सकती है। उन्होंने कहा था कि राजद और कांग्रेस का गठबंधन नई दिल्ली में है। उधर, समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष मदन मोहन झा ने आरोप लगाया है कि हमारी पार्टी के नेताओं ने चुनावों में सीट बंटवारे पर चर्चा के लिए राजद प्रमुख से समय मांगा था लेकिन उनकी ओर से कोई उत्तर ही नहीं आया।

‘राजद को लेना होगा बिहार में महागठबंधन के भविष्य पर फैसला’

झा ने कहा, ‘हमारे नेताओं ने लालू यादव से मिलने के लिए समय मांगा था ताकि सीट बंटवारे को लेकर बातचीत हो सके, लेकिन अभी तक लालू यादव की ओर से हमें कोई समय नहीं दिया गया है। इसलिए, कांग्रेस पार्टी विधान परिषद चुनाव अपने स्तर पर लड़ने की तैयारी कर रही है।’ उन्होंने कहा कि उपचुनाव के बाद लालू यादव ने कहा था कि आगामी विधान परिषद चुनाव में गठबंधन के भागीदार साथ चुनाव लड़ेंगे और कांग्रेस को 6-7 सीटें दी जाएंगी।

मदन मोहन झा ने कहा राजद को बिहार में महागठबंधन के भविष्य के लिए फैसला लेना होगा। उन्होंने कहा, ‘लालू यादव और तेजस्वी यादव के बयानों में अंतर है, इसलिए पहले बाप-बेटे को निर्णय करना होगा कि वह महागठबंधन बरकरार रखना चाहते हैं या नहीं। क्या वह विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस के साथ सीट बंटवारा करना चाहते हैं या नहीं।’ झा ने कहा कि कांग्रेस सभी 24 सीटों पर चुनाव लड़ने में सक्षम है और प्रत्याशियों की सूची भी तैयार है।

उन्होंने कहा कि हमारे पास प्रत्याशियों की एक संबी सूची है जो चुनाव लड़ना चाहते हैं। कई सीटों पर हम बहुत मजबूत स्थिति में हैं और प्रभावी तरीके से चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि, झा ने कहा कि सभी 24 सीटों पर चुनाव लड़ने का अंतिम फैसला पार्टी हाई कमान की ओर से ही किया जाएगा। उन्होंने कहा, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को प्रदेश में राजद के रुख और स्थिति के बारे में पूरी जानकारी दी जा चुकी है और अब इस पर अंतिम फैसला उन्हें लेना है।

बिहार में विधान परिषद चुनावों के लिए अब अधिक समय शेष नहीं रह गया है। ये चुनाव इस साल मार्च-अप्रैल में हो सकते हैं और इससे ठीक पहले कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का महागठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि राजद नेता तेजस्वी यादव ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। तेजस्वी के इस रुख पर कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी सभी 24 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने में सक्षम है।

2016 में इन 24 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस ने चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और इनमें से केवल एक सीट पर उसे जीत नसीब हुई थी। इस बार चुनाव में कांग्रेस ने छह सीटों की मांग की थी, जिस पर राजद के साथ सहमति नहीं बन पाई। पिछले साल अक्तूबर में कुशेश्वरस्थान और तारापुर में हुए विधानसभा उपचुनाव में भी राजद और कांग्रेस ने अलग चुनाव लड़ा था और दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने प्रत्याशी खड़े किए थे।

शनिवार को तेजस्वी यादव ने संकेत दिया था कि हमारी पार्टी एमएलसी चुनावों में अकेले चुनाव लड़ सकती है। उन्होंने कहा था कि राजद और कांग्रेस का गठबंधन नई दिल्ली में है। उधर, समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष मदन मोहन झा ने आरोप लगाया है कि हमारी पार्टी के नेताओं ने चुनावों में सीट बंटवारे पर चर्चा के लिए राजद प्रमुख से समय मांगा था लेकिन उनकी ओर से कोई उत्तर ही नहीं आया।

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