संदिग्ध के नेता सीवान पहुंचे तो सही में मारे गए लोगों को शैतान दिया गया था…गुस्से में बहुत कुछ कह गए
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सीवान में ज़हरीली शराब पीने से हुई मौत के बाद परिजन और मरीज से मिलने प्रतिपक्ष नेता विजय सिन्हा सदर अस्पताल पहुंचे। लेकिन जब इस बात की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को मिली तो यह हद हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने विजय सिन्हा के आने के पहले उन इलाज करने वाले मरीजों को जबरन अस्पताल से जांच कर अस्पताल से हटा दिया। अस्पताल में विजय सिन्हा को भी इस बात की जानकारी मिली। फिर क्या था, विजय सिन्हा सरकार और प्रशासन दोनों पर जोरदार बरसे। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तरह से छुपा रहा है। उन्होंने कहा कि आप सच को स्वीकार नहीं करेंगे तो बीमारी दूर नहीं होगी। अपराधी पकड़े नहीं जाएंगे। उन्होंने बिहार सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि किसी में ठीक नहीं है। ये नहीं चाहते हैं कि समाधान हो। उन्होंने बताया कि मेरे पास जो रिपोर्ट है उसमें जहरीली शराब पीने से 12 लोगों की मौत हो गई है।

इन पर भी हो स्टेट्स

विजय सिन्हा ने कहा कि छपरा की घटना के बाद हुई और उप-भाग ने यदि सम्मान से इसकी समीक्षा की तो यह घटना नहीं हुई। इसलिए उन दोनों पर भी स्थिति बनी हुई है, इन पर भी धारा 302 का मुकदमा चलाया जाना चाहिए कि ये जिम्मेदारी उनकी थी, सत्ता में ये बैठे हैं। उन्होंने कहा कि स्थिर और स्थिर ने इस की समीक्षा क्यों नहीं की। आप वहां के एसपी को शाबाशी दे रहे हैं। शर्म आनी को चाहिए ऐसे लोगों को, अधिकार है ऐसे शासन में बैठने वाले लोगों को।

अधिकारियों से हुई बहस,कहा-सर्किट हाउस में बुलाओ

सदर अस्पताल में आने के बाद मरीज को जबरन अस्पताल से नौकरशाही करने के मामले में विजय सिन्हा की उन डॉक्टरों से भी राय हुई। वे पुलिस प्रशासन को सर्किट हाउस बुलाने का आदेश देते हुए वहां से प्रस्थान कर गए।

जरूरी में इन्हें व्यामाया अस्पताल से कहते हैं

वर्कर किए गए ग्रामीणों में लाल मांझी के बेटे जितेंद्र मांझी, मुतुर मांझी के बेटे शंकर मांझी और प्रेरित मांझी के बेटे लोरिक मांझी शामिल हैं। सीवान में जहरीली शराब पीने से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन प्रशासन 5 की मौत की ही पुष्टि कर रहा है।

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