अखिलेश सिंह को दी गई बिहार कांग्रेस की कमान।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश सिंह बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए हैं। अखिलेश सिंह मदन मोहन झा की जगह। अखिलेश राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते हैं। कांग्रेस को फिर से राजद के करीब आने में अखिलेश सिंह का काफी अहम रोल रहा था। 2018 में बिहार से राज्यसभा के फिर गए थे। अखिलेश सिंह को आगामी आगामी विधानसभा और विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है।

भूमिहार जाति से आते हैं अखिलेश
अखिलेश सिंह भूमिहार जाति से आते हैं। वह 2010 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजद का दामन छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे। उस समय अखिलेश सिंह का एक बयान काफी चर्चा में था। उन्होंने लालू और परमाणु पर साधते हुए कहा था कि मैंने कुशासन बाबू लालू प्रसाद और सुशासन बाबू बटन दोनों को देखा। इन लोगों ने उच्च वर्ग की आवाज पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसलिए मैंने राजद को छोड़ कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया जो जात पंथ से अलग हट कर सभी राजनीतिक नेताओं को सम्मान देता है।

पार्टियों के सहयोगी दबाव में रहते हैं
12 साल बाद बिहार में कांग्रेस, जदयू और राजद के साथ हैं। ऐसे में अखिलेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई तो उनकी यह पुरानी मान्यताएं फिर से चर्चा में हैं। हालांकि, अखिलेश सिंह विधानसभा चुनाव 2020 से पांच महीने पहले भी चर्चा में आए थे। तब उन्होंने टिकट को लेकर राजद पर काफी दबाव भी बनाया था। उस समय उन्होंने 2015 की तुलना में ज्यादा सीटें देने की मांग की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने उस ज़बर्दस्त यादव के नेतृत्व पर भी सवाल खड़ा किया था। अखिलेश सिंह ने कहा था कि महागठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा, अभी तय नहीं है। उनके यह बयान भी काफी चर्चा में रहे।

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पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश सिंह बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए हैं। अखिलेश सिंह मदन मोहन झा की जगह। अखिलेश राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते हैं। कांग्रेस को फिर से राजद के करीब आने में अखिलेश सिंह का काफी अहम रोल रहा था। 2018 में बिहार से राज्यसभा के फिर गए थे। अखिलेश सिंह को आगामी आगामी विधानसभा और विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है।

भूमिहार जाति से आते हैं अखिलेश

अखिलेश सिंह भूमिहार जाति से आते हैं। वह 2010 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजद का दामन छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे। उस समय अखिलेश सिंह का एक बयान काफी चर्चा में था। उन्होंने लालू और परमाणु पर साधते हुए कहा था कि मैंने कुशासन बाबू लालू प्रसाद और सुशासन बाबू बटन दोनों को देखा। इन लोगों ने उच्च वर्ग की आवाज पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसलिए मैंने राजद को छोड़ कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया जो जात पंथ से अलग हट कर सभी राजनीतिक नेताओं को सम्मान देता है।

पार्टियों के सहयोगी दबाव में रहते हैं

12 साल बाद बिहार में कांग्रेस, जदयू और राजद के साथ हैं। ऐसे में अखिलेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई तो उनकी यह पुरानी मान्यताएं फिर से चर्चा में हैं। हालांकि, अखिलेश सिंह विधानसभा चुनाव 2020 से पांच महीने पहले भी चर्चा में आए थे। तब उन्होंने टिकट को लेकर राजद पर काफी दबाव भी बनाया था। उस समय उन्होंने 2015 की तुलना में ज्यादा सीटें देने की मांग की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने उस ज़बर्दस्त यादव के नेतृत्व पर भी सवाल खड़ा किया था। अखिलेश सिंह ने कहा था कि महागठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा, अभी तय नहीं है। उनके यह बयान भी काफी चर्चा में रहे।

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